पदे पद ४४

विश्वरूप सदाशिव ये ये हा देखिले डोळा।
सवे पाळ नीळा नंदी ढवळा।
अर्धांगी बैसली ये ये हा शैल्यबाळा।
मुकुटी गंगा वाहे झुळझुळा।१।

जय जय शंकर ये ये हा शूळपाणी।
(ब्रह्मादिक) सनकादिक उभे कर जोडूनी।६।

त्रिपुंड्र टिळकू ये ये हा दिव्य कुंडले।
मुखप्रभा कोटी भानू तेज लोपलें।
अधरा दीप्ती हळाहळा ये ये हा कंठी मिरवले।
वासुकि हार गळा।। पदक शोभले।२।

त्रिशूळ डमरू ये ये हा जटांचा भारू।
विभूतीर्चे उधळण हा जाळंधरू।। रुंड माळा शोभती ये ये हा सर्प विखारू।। अति रूप लावण्य उमा शंकरू।३।

कमंडलू आधारू ये ये हा मेखळा साजे।
कीर्तिमुख बाह्यवट शोभती भुजे।
शृंगिया एक नादें ये ये हा गगन गर्ने।
आनंदे ब्रह्मानंदे नाचती भुजे।४।

व्याघ्रांबर परिधान ये ये हा चरणि तोडरू।
नूपुरें झणत्कारें गर्जे अंबरू।
मोरया गोसावी ये ये हा योगी गंभीर।
वरदमूर्तिकृपेनें ध्यानी शंकर।५।

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